मगर कुछ ही मीटर की दूरी पर स्थित प्रयोगशाला के बारे में भी संदेह जताया जा रहा है कि वायरस का प्रसार वहां से शुरू हुआ। पहले मीडिया में इस पर ख़ूब बहस हुई और फिर अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो ने कहा कि इस विचार पर जांच हो रही है।
यहां हम उन महत्वपूर्ण सवालों के बारे में आपको बता रहे हैं जो वुहान की प्रयोगशाला को लेकर उठाए जा रहे हैं।
यह प्रयोगशाला क्या है?
वाशिंग्टन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि बीजिंग में अमरीकी दूतावास के प्रतिनिधियों ने वुहान प्रयोगशाला का कई बार दौरा किया और 2018 में अमरीकी प्रशासन को सूचित किया था कि इस प्रयोगशाला में सेफ़्टी के मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है।
फ़ाक्स न्यूज़ ने भी कई ख़ुफ़िया सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी कि वुहान में जो कोरोना वायरस फैला है उसकी शुरूआत शहर की इसी प्रयोगशाला से हुई है। अगर यह वायरस चीनियों ने नहीं बनाया है तो भी किसी ग़लती की वजह से यह वायरस फैल गया है।
इस प्रयोगशाला को कड़ी सुरक्षा में रखा जाता है और वहां सेफ़्टी के बड़े कठोर नियमों को लागू किया गया है क्योंकि वहां इबोला जैसे बहुत से ख़तरनाक वायरसों पर रिसर्च होती है।
यह प्रयोगशाला फ्रांस की मदद से बनाई गई जहां संक्रामक रोगों की रोकथाम के सटीक उपायों के बारे में शोध किया जाता है।
प्रयोगशाला के निर्णम में 40 मिलियन यूरो ख़र्च हुए। यह बी-4 ग्रेड की प्रयोगशाला है। दुनिया में इस ग्रेड की लगभग 30 प्रयोगशालाएं हैं।
इस प्रयोगशाला में अलग अलग वायरसों को 1500 नमूने मौजूद हैं और इसे एशिया की सबसे महत्वपूर्ण वायरोलोजी लैब माना जाता है। अमरीकी मीडिया में बी-4 प्रयोगशाला की बात हो रही है लेकिन कोरोना वायरस जैसे शोध जिसमें बहुत अधिक रिस्क नहीं होता बी-3 ग्रेड की प्रयोगशालाओं में किए जाते हैं अलबत्ता वुहान की प्रयोगशाला में वह भाग भी मौजूद है।
क्या वाक़ई कोरोना वायरस यहीं से फैला है?
इस बारे में कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। वाशिंग्टन पोस्ट और फ़ाक्स न्यूज़ ने जानकार सूत्रों के हवाले से सारे दावे किए हैं। फ़ाक्स न्यूज़ का दावा है कि जिस पहले मरीज़ पर प्रयोगशाला के भीतर शोध किया गया वही अपने साथ यह वायरस लेकर बाहर आ गया।
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प और विदेश मंत्री माइक पोम्पेयो कई बार चीन पर संदेह जता चुके हैं और धमकी भरे बयान भी दे चुके हैं कि अगर चीन ने जान बूझ कर यह किया है तो उसे ख़मियाज़ा भुगतना पड़ेगा।
बहरहाल प्रयोगशाला के डायरेक्टर ने आरोपों का पूरी तरह खंडन किया है।
वैज्ञानिक क्या कहते हैं?
बहुत से वैज्ञानिक यह मानते हैं कि कोरोना वायरस निकला तो चमगादड़ से ही है लेकिन वह इंसान तक पहुंचने से पहले किसी और प्राणी के भीतर ट्रांसमिट हुआ है। चीनी विशेषज्ञ कहते हैं कि यह बीच वाला प्राणी ऐसा है जो चींटियां खाता है। यह स्तनधारी प्राणी है जो विलुप्त होने की कगार पर है।
कुछ अन्य चीनी वैज्ञानिक कहते हैं कि कोरोना वायरस का जो पहला मरीज़ है वह वुहान के उस बाज़ार में नहीं गया था जहां अलग अलग प्रकार के जानवर बिकते हैं।
लंदन के किंग्ज़ कालेज की बायोसेफ़्टी रिसर्चर फ़िलिपा लिन्ज़ोस का कहना है कि अब तक यह सवाल अपनी जगह मौजूद है कि कोरोना वायरस की शुरुआत कहां से हुई। उन्होंने कहा कि कोई भी साक्ष्य नहीं है जिससे यह संकेत मिले कि वायरस प्रयोगशाला से फैला है और इसी तरह इस का भी साक्ष्य नहीं है कि यह वायरस वुहान के जानवरों के बाज़ार से निकला है।
स्रोतः एएफ़पी+अलजज़ीरा